शरिया कानून मतलब "कोई आज़ादी नहीं महिलाओं के लिए"

अगर बात करें आज़ादी की वो भी महिलाओं के हक़ में शरिया कानून के अनुशार, ये बिलकुल ऐसा है जैसे खारे समन्द में मीठा पानी मिलना मतलब बिलकुल ही नामुमकिन। आज पूरा अफगानिस्तान परेशान हैं तालिबान से पर अगर ये बोला जाए कि अफगान ही इसके जिमेदार है इशमे कोई गलत बात नही हैं क्योंकि जब शरिया के लिए वोट हुआ था तब 99% लोगों ने शरिया को ही चुना था। अब जो होगा या जो हो रहा है ये अफगानो का ही कर्म है, हम बस उनके लिए भगवान से प्राथना ही कर सकते है।

Write a comment ...

Write a comment ...